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अभ्यास दोस्ती-17: हिंद महासागर में भारत, श्रीलंका और मालदीव की 'त्रिशक्ति', जानिए मुख्य विशेषताएं

 

 अभ्यास दोस्ती-17: हिंद महासागर में भारत, श्रीलंका और मालदीव की 'त्रिशक्ति', जानिए मुख्य विशेषताएं



हिंद महासागर में रणनीतिक सुरक्षा और समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय तटरक्षक बल (ICG), श्रीलंका तटरक्षक (SLCG), और मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल (MNDF) ने मिलकर 'दोस्ती-17' अभ्यास का सफल आयोजन किया है। मालदीव की राजधानी माले में आयोजित यह 17वां द्विवार्षिक (दो साल में एक बार होने वाला) अभ्यास क्षेत्रीय शांति की दृष्टि से एक बड़ा कदम है।प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे IAS, RAS, REET, SSC, Railway) की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए इस अभ्यास से जुड़े मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं।अभ्यास 'दोस्ती-17' का मुख्य एजेंडा और चरणइस तीन दिवसीय समुद्री अभ्यास को अधिक प्रभावी बनाने के लिए दो विशेष चरणों में विभाजित किया गया था:हार्बर चरण (Harbor Phase): इसमें तीनों देशों के कमांडरों और अधिकारियों ने टेबल-टॉप चर्चाएं कीं और आधुनिक समुद्री सुरक्षा तकनीकों को साझा किया।सी चरण (Sea Phase): इसके तहत समुद्र के बीचों-बीच वास्तविक आपातकालीन स्थितियों, जैसे समुद्री डकैती रोकना, तेल रिसाव (Oil Spill) नियंत्रण और खोज एवं बचाव (Search & Rescue) कार्यों का कड़ा अभ्यास किया गया।इस बार भारतीय दल की कमान तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि के हाथों में रही, जबकि श्रीलंका की ओर से डीजी एडमिरल रोहन जोसेफ ने नेतृत्व किया।द्विपक्षीय से त्रिपक्षीय बनने का सफर (इतिहास)शुरुआत (1991): इस अभ्यास की नींव साल 1991 में पड़ी थी। शुरुआत में यह केवल भारत और मालदीव के बीच एक द्विपक्षीय (Bilateral) अभ्यास हुआ करता था।विस्तार (2012): साल 2012 में इस सुरक्षा चक्र को मजबूत करने के लिए श्रीलंका को भी इसमें शामिल किया गया, जिसके बाद यह त्रिपक्षीय (Trilateral) अभ्यास बन गया।पिछला आयोजन: 'दोस्ती' अभ्यास का पिछला संस्करण फरवरी 2024 में मालदीव के समुद्र में ही पूरा किया गया था।परीक्षा उपयोगी तथ्य: भारतीय तटरक्षक बल (ICG)इस टॉपिक से अक्सर सामान्य ज्ञान (GK) और करंट अफेयर्स में प्रश्न पूछे जाते हैं:स्थापना वर्ष: 1977 (संसदीय अधिनियम के तहत आधिकारिक रूप से 1978)प्रधान कार्यालय: नई दिल्लीवर्तमान मुखिया (DG): परमेश शिवमणिमूल मंत्र (Motto): वयम रक्षामः (Vayam Rakshamah) - जिसका अर्थ है 'हम रक्षा करते हैं'

न्यायमूर्ति रंजना देसाई बनीं अध्यक्ष, जानिए कर्मचारियों के वेतन पर क्या होगा असर



 न्यायमूर्ति रंजना देसाई बनीं अध्यक्ष, जानिए कर्मचारियों के वेतन पर क्या होगा असर


न्यायमूर्ति रंजना देसाई बनीं अध्यक्ष, जानिए कर्मचारियों के वेतन पर क्या होगा असरकेंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस आयोग का नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमुर्ति रंजना देसाई करेंगी।यदि आप एक सरकारी कर्मचारी हैं या इस नए वेतन आयोग के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहाँ हम इसके गठन, इसके सदस्यों और आपके वेतन पर पड़ने वाले प्रभाव का पूरा विश्लेषण करेंगे।आठवें वेतन आयोग का ढांचा और मुख्य सदस्यसरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस आयोग में अध्यक्ष के साथ-साथ दो अन्य प्रमुख सदस्यों को भी शामिल किया गया है:अध्यक्ष: न्यायमूर्ति रंजना देसाई (सेवानिवृत्त न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट)सदस्य: प्रोफेसर पुलक घोष (आईआईएम बैंगलोर)सदस्य-सचिव: पंकज जैन (सचिव, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय)न्यायमुर्ति रंजना देसाई का अनुभव: इससे पहले वे 2020 में परिसीमन आयोग और उत्तराखंड तथा गुजरात में समान नागरिक संहिता (UCC) समितियों की कमान संभाल चुकी हैं। उनका यह प्रशासनिक अनुभव आयोग की रिपोर्ट तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगा।किन लोगों को मिलेगा इस आयोग का लाभ?इस नए वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा असर देश के एक बड़े वर्ग पर पड़ेगा। आंकड़ों के अनुसार:लगभग 50 लाख से अधिक सक्रिय केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में संशोधन होगा।करीब 69 लाख पेंशनभोगियों की पेंशन राशि में बढ़ोतरी की जाएगी।इसके अलावा, केंद्र के इस फैसले का पालन करते हुए राज्य सरकारें भी अपने कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बदलाव करेंगी।रिपोर्ट कब आएगी और यह कब से लागू होगा?कैबिनेट की बैठक में तय की गई शर्तों के मुताबिक, आठवें वेतन आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।आमतौर पर हर दस साल के अंतराल पर नया वेतन आयोग लागू किया जाता है। सातवां वेतन आयोग 2016 में आया था, इस ट्रेंड को देखते हुए उम्मीद है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी रूप से लागू मानी जा सकती हैं।7वें और 8वें वेतन आयोग में क्या बदलेगा? (Salary Calculation)पिछली बार यानी जुलाई 2016 में जब 7वां वेतन आयोग लागू हुआ था, तब कर्मचारियों को 6 महीने का बकाया (Arrears) मिला था। उस समय 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया गया था, जिससे मूल वेतन (Basic Pay) में लगभग 23.5% की वास्तविक वृद्धि हुई थी।महंगाई भत्ता (DA) हो जाएगा शून्य:नए नियम के अनुसार, जैसे ही 8वां वेतन आयोग पूरी तरह लागू होगा, वर्तमान में चल रहा महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) समाप्त होकर शून्य (0) हो जाएगा। इस राशि को कर्मचारियों के मूल वेतन (Basic Salary) में जोड़ दिया जाएगा, जिससे आपकी टेक-होम सैलरी (In-hand Salary) में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम मेंभारत में Google का बड़ा निवेश: विशाखापत्तनम में शुरू होगा एशिया का सबसे बड़ा AI हब


भारत में Google का बड़ा निवेश: विशाखापत्तनम में शुरू होगा एशिया का सबसे बड़ा AI हब




तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी गूगल (Google) ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्रांति को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में Google AI Hub की शुरुआत की जा रही है, जो अमेरिका के बाहर गूगल का सबसे बड़ा एआई केंद्र होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पहल की सराहना करते हुए इसे भारत के डिजिटल भविष्य के लिए एक बड़ा मील का पत्थर बताया है।$15 अरब का निवेश और अदाणी समूह के साथ साझेदारीगूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट (Alphabet) ने घोषणा की है कि वह अगले पांच वर्षों में भारत के तकनीकी बुनियादी ढांचे में 15 अरब डॉलर (लगभग ₹1.25 लाख करोड़) का निवेश करेगी।विशाखापत्तनम में बनने वाले इस विशाल परिसर में 1 गीगावाट (GW) की क्षमता वाला डेटा सेंटर स्थापित किया जाएगा।इस प्रोजेक्ट के लिए गूगल ने भारत के दिग्गज अदाणी समूह (Adani Group) के साथ हाथ मिलाया है।यह निवेश आंध्र प्रदेश सरकार के उस लक्ष्य का हिस्सा है, जिसके तहत वे 2029 तक राज्य में 6 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना चाहते हैं।क्या होता है AI डेटा सेंटर और इसका महत्व?डेटा सेंटर मूल रूप से ऐसी भौतिक सुविधाएं (Physical Facilities) होती हैं, जिनमें हजारों शक्तिशाली कंप्यूटिंग सर्वर, स्टोरेज सिस्टम और हाई-स्पीड नेटवर्क उपकरण लगे होते हैं। इनका उपयोग डेटा को सुरक्षित रूप से स्टोर, प्रोसेस और डिस्ट्रीब्यूट करने के लिए किया जाता है।भारत में तेजी से बढ़ते इंटरनेट उपयोगकर्ताओं (जो जल्द ही 90 करोड़ को पार कर जाएंगे) की जरूरतों को पूरा करने के लिए गूगल का यह हब एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति और एक मजबूत फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क से लैस होगा।वैश्विक कंपनियों में मची होड़भारत के विशाल बाजार को देखते हुए केवल गूगल ही नहीं, बल्कि दुनिया की अन्य बड़ी टेक कंपनियां भी यहाँ निवेश कर रही हैं:माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न: पहले ही भारत में अपने क्लाउड और डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर चुके हैं।OpenAI (ChatGPT निर्माता): इसके प्रमुख सैम ऑल्टमैन ने भी जल्द ही भारत में अपना आधिकारिक कार्यालय खोलने के संकेत दिए हैं।[Post 2: New Title] अभ्यास दोस्ती 17: भारत, श्रीलंका और मालदीव का मालदीव में त्रिपक्षीय नौसैनिक युद्धाभ्यासहिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और तटरक्षक बलों के बीच आपसी तालमेल को बेहतर बनाने के लिए भारत, श्रीलंका और मालदीव ने संयुक्त रूप से 'दोस्ती-17' (Dosti 17) अभ्यास का आयोजन किया। मालदीव की राजधानी माले में आयोजित यह 17वां द्विवार्षिक त्रिपक्षीय अभ्यास समुद्री सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।दो चरणों में आयोजित हुआ युद्धाभ्यासयह महत्वपूर्ण समुद्री अभ्यास मुख्य रूप से दो चरणों में आयोजित किया गया था:हार्बर चरण (Harbor Phase): इसमें तटरक्षक बलों के अधिकारियों ने रणनीतिक चर्चाएं कीं और अनुभवों को साझा किया।परिचालन समुद्री चरण (Operational Sea Phase): इसके तहत समुद्र के भीतर वास्तविक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और रेस्क्यू ऑपरेशन्स का लाइव अभ्यास किया गया।इस अभ्यास में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने किया, जबकि श्रीलंका का प्रतिनिधित्व वहां के डीजी एडमिरल रोहन जोसेफ ने किया।'अभ्यास दोस्ती' का इतिहास और महत्व'दोस्ती' अभ्यास की शुरुआत आज से तीन दशक पहले हुई थी:1991 में शुरुआत: यह शुरुआत में केवल भारत (ICG) और मालदीव (MNDF) के बीच एक द्विपक्षीय (Two-nation) अभ्यास था।2012 में विस्तार: श्रीलंका के शामिल होने के बाद यह एक त्रिपक्षीय (Trilateral) सैन्य अभ्यास में बदल गया।पिछला संस्करण: इससे पहले दोस्ती अभ्यास का आयोजन फरवरी 2024 में किया गया था।भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के बारे में कुछ मुख्य तथ्यप्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए भारतीय तटरक्षक बल से जुड़े ये बिंदु बेहद महत्वपूर्ण हैं:स्थापना: 1977मुख्यालय: नई दिल्लीवर्तमान महानिदेशक (DG): परमेश शिवमणिआदर्श वाक्य (Motto): वयम रक्षामः (अर्थात - हम रक्षा करते हैं

भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी: बैरन द्वीप पर फिर हुआ धमाका, जानिए इससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य



भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी: बैरन द्वीप पर फिर हुआ धमाका, जानिए इससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य


 

भारत के भूगोल और प्राकृतिक अजूबों में रुचि रखने वालों के लिए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से एक बेहद रोमांचक खबर सामने आई है। भारत के इकलौते सक्रिय ज्वालामुखी, बैरन द्वीप ज्वालामुखी (Barren Island Volcano), में एक बार फिर कम तीव्रता वाले (हल्के) विस्फोट दर्ज किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, महज आठ दिनों के भीतर यहाँ दो बार हल्के ज्वालामुखी विस्फोट देखे गए। है बैरन द्वीप और कहाँ स्थित है?बैरन द्वीप (Barren Island) अंडमान सागर में स्थित एक पूरी तरह से निर्जन (Uninhabited) द्वीप है, यानी यहाँ कोई भी आम नागरिक या आबादी नहीं रहती है।दूरी: यह अंडमान और निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर से समुद्र मार्ग द्वारा लगभग 140 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है।विशेषता: यह न केवल भारत का, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया (South Asia) का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है।विवर्तनिक प्लेटों (Tectonic Plates) का संगमभौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील है। बैरन द्वीप भारतीय (Indian) और बर्मी (Burmese) टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन बिंदु यानी सबडक्शन ज़ोन (Subduction Zone) पर स्थित है। इन प्लेटों के भीतर होने वाली आंतरिक हलचल और मैग्मा के दबाव के कारण ही यहाँ समय-समय पर ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं। यह मुख्य रूप से लावा, चट्टानों के टुकड़ों और ज्वालामुखीय राख से बना एक स्ट्रैटोज्वालामुखी (Stratovolcano) है।बैरन द्वीप ज्वालामुखी का इतिहास और महत्वपूर्ण वर्षइस ज्वालामुखी का इतिहास काफी पुराना और दिलचस्प रहा है:पहला रिकॉर्डेड विस्फोट: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस द्वीप पर सबसे पहला ज्वालामुखी विस्फोट साल 1787 में दर्ज किया गया था।लंबी शांति के बाद वापसी: इसके बाद यह ज्वालामुखी लगभग 150 से अधिक वर्षों तक शांत (Dormant) रहा और साल 1991 में यह अचानक दोबारा सक्रिय हो गया।हालिया गतिविधियां: 1991 के बाद से यहाँ साल 2005, 2017, 2022 और अब हाल ही में इसमें फिर से हल्के विस्फोट देखे गए हैं।भारत के दो प्रमुख ज्वालामुखी (परीक्षा के लिए विशेष)अक्सर परीक्षाओं में भारत के ज्वालामुखियों को लेकर भ्रम की स्थिति रहती है, इसे स्पष्ट रूप से समझें:बैरन ज्वालामुखी (Barren Volcano): यह मध्य अंडमान के पूर्व में स्थित है और भारत का एकमात्र सक्रिय (Active) ज्वालामुखी है।नारकोंडम ज्वालामुखी (Narcondam Volcano): यह उत्तरी अंडमान के पूर्व में स्थित है, लेकिन यह एक प्रसुप्त/शांत (Dormant) ज्वालामुखी है, जिसमें लंबे समय से कोई विस्फोट नहीं हुआ है।

भारत के 15वें उपराष्ट्रपति बने सी. पी. राधाकृष्णन: जानिए चुनाव प्रक्रिया और राजनीतिक सफर से जुड़े मुख्य तथ्य

 

भारत के 15वें उपराष्ट्रपति बने सी. पी. राधाकृष्णन: जानिए चुनाव प्रक्रिया और राजनीतिक सफर से जुड़े मुख्य तथ्य




भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। एनडीए (NDA) उम्मीदवार और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन को भारत का नया और 15वां उपराष्ट्रपति चुना गया है। उन्होंने इस कड़े मुकाबले में विपक्षी गठबंधन (INDIA) के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को पटखनी दी।प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और राजनीति में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए इस चुनाव और सी. पी. राधाकृष्णन के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण रणनीतिक बिंदु नीचे दिए गए हैं।उपराष्ट्रपति चुनाव के आंकड़े (Election Voting Stats)राज्यसभा के महासचिव और मुख्य निर्वाचन अधिकारी पी. सी. मोदी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस चुनाव में भारी मतदान देखने को मिला:कुल मतदान: कुल 781 योग्य मतदाताओं में से 767 सांसदों ने अपने मत का प्रयोग किया (यानी लगभग 98.2% मतदान)।वैध और अवैध मत: डाले गए 767 वोटों में से 752 वोट पूरी तरह वैध पाए गए, जबकि 15 वोटों को अमान्य (इलीगल) घोषित कर दिया गया।जीत का अंतर: एनडीए के उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंदी बी. सुदर्शन रेड्डी केवल 300 वोट ही हासिल कर सके। इस तरह उन्होंने 152 वोटों के अंतर से यह ऐतिहासिक जीत दर्ज की।उपराष्ट्रपति चुनाव का निर्वाचक मंडल (Electoral College)भारतीय संविधान के नियमों के अनुसार, देश के उपराष्ट्रपति का चुनाव एक विशेष निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है कि इसमें कौन भाग लेता है:लोकसभा के सदस्य: इसमें लोकसभा के सभी 543 निर्वाचित सांसद वोट डालते हैं।राज्यसभा के सदस्य: इसमें राज्यसभा के निर्वाचित सदस्यों के साथ-साथ 12 मनोनीत (Nominated) सदस्य भी मतदान करने के पात्र होते हैं। (ध्यान रहे, राष्ट्रपति चुनाव में मनोनीत सदस्य वोट नहीं दे सकते, लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में देते हैं)।सी. पी. राधाकृष्णन: जमीन से शीर्ष तक का राजनीतिक सफर20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुप्पुर में जन्मे चंद्रपुरम पोन्नुसामी (सी.पी.) राधाकृष्णन का राजनीतिक जीवन बेहद प्रेरणादायक रहा है:शुरुआती जीवन: उन्होंने मात्र 17 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनसंघ के सदस्य के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी।संसदीय सफर: उन्होंने कोयंबटूर लोकसभा सीट से 1998 और 1999 के आम चुनावों में भारी अंतर से जीत हासिल की थी।शिक्षा: उन्होंने तमिलनाडु के थूथुकुडी स्थित वी. ओ. चिदंबरम कॉलेज से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है।संवैधानिक पद: उपराष्ट्रपति बनने से पहले वे झारखंड और महाराष्ट्र जैसे महत्वपूर्ण राज्यों के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।परीक्षा के लिए विशेष: उपराष्ट्रपति पद का इतिहासपहले उपराष्ट्रपति: स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन थे, जिन्होंने 13 मई 1952 को कार्यभार संभाला था।विशेष तथ्य: भारत के इतिहास में कृष्णकांत एकमात्र ऐसे उपराष्ट्रपति रहे हैं, जिनका निधन उनके कार्यकाल के दौरान (21 अगस्त 1997 से 27 जुलाई 2002) हुआ था।

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अभ्यास दोस्ती-17: हिंद महासागर में भारत, श्रीलंका और मालदीव की 'त्रिशक्ति', जानिए मुख्य विशेषताएं

    अभ्यास दोस्ती-17: हिंद महासागर में भारत, श्रीलंका और मालदीव की 'त्रिशक्ति', जानिए मुख्य विशेषताएं हिंद महासागर में रणनीतिक सुरक्...